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Friday, 2 August 2024
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अरमान के शेर
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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कुँवर नारायण की आत्मजयी को प्रकाशित हुए पचास साल से ज्यादा हो चुके हैं। इन पचास सालों में कुँवर जी ने कई महत्त्वपूर्ण कृतियों से भारतीय भा...
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नहीं हटूंगा ,डटा रहूंगा , इसी बर्थ पर मर मिटूंगा . कलकत्ता में हमने बसों में महिला सीटें आरक्षित होते देखीं हैं. सीट न मिलने पर लोग उन प...
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सत्ता और साहित्य सत्ता, वर्चस्व और प्रतिरोध के समेकित अन्तः क्रियाओं का नाम है| मानवीय सभ्यता की शुरुआत से ही सत्ता मनोवृति के र...