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Friday, 9 July 2021

मेरे शेर

लिखने वाले ने ब्रेल में लिखा है तुम्हें
जब तलक उँगलियाँ न फिराओ पढ़ना मुश्किल है

-अरमान

Tuesday, 8 March 2016

सुबह ए बनारस

सुबह ए बनारस

लल्लापुरा की किसी मस्जिद से उठती है एक अजान

और बनारस घंटियों की शक्ल में झूम उठता है

सूरज का रंग गंगा के पानी पर

कुछ इस तरह फैलता है जैसे

किसी चित्रकार ने अभी अभी साफ़ पानी में अपनी कूचियां डुबो दी हो

गलियों में महादेव को रोज ढूंढता नंदी

टांगें झाड़ खड़ा होता है

शीतलाघाट पर पानी से बाहर आता साधू

अपनी जटाओं से झटक देता है गंगा को
गंगा खिलखिलाती चल पड़ती है सागर की तरफ

दुगुने जोश के साथ

यह सुबह ऐ बनारस है


अरमान

रपट (कविता)

इस दफे गांव लौटा हूँ

जहाँ सूनी आँखें

और भटकता हुआ सन्नाटा जहां मेरा इंतज़ार करता है

हवा रुआंसी है

इस मौसम के आंसू मैंने सुबह सुबह दूब पर बिखरे हुए देखे हैं

गांव की मेंड़ पर एक उदास देवता का मन्दिर देखा है

आँगन की नीम पर बैठी एक उदास बूढ़ी कोयल देखी है

जो लड़खड़ाती आवाज में सोहर गाती है

सावन का अल्हड़ झूला कोने में

बैठा है चुपचाप

कुछ हुआ है मेरे गाँव में

कहतें हैं एक उम्र गायब हुई है मेरे गांव से

अब बसन्त में उदास फूल खिला करते हैं

उदास बादल

कभी रोते

कभी सिसकियाँ भरते

कभी दम साध

उस उम्र क़ी तलाश में शहर की ओर उड़ जाते हैं

एक उम्र गायब हुई है मेरे गांव से

जो सुना है

दिल्ली उज्जैन अहमदाबाद कि गलियों में सूरत लटकाये उदास घूमा करती है

पंखे में नायलॉन की रस्सियाँ बाँधने से पहले

माँ और बाउ जी की तस्वीरों पर फूट फूट रोया करती है

ईक उम्र ग़ायब हुई है मेरे गाँव से

जिसकी रपट कोई थानेदार नहीं लिखता

#अरमान

अभी अभी जवान हुई लड़की (कविता )

अभी अभी जवान हुई लड़की

गुमसुम है ...

चुप्प

खोई खोई सी खुशनुमा आँखें लिए बेतरतीब बालों के पीछे चेहरा छुपाये

सर झुकाए

बहुत कुछ तोड़कर

कुछ बना रही है।

अभी अभी जवान हुई लड़की

रोज शाम को

अपने चेहरे से चाँद को उतार कर आसमान पर खूंटी से टांग देती है

और सारे राह किसी आवारा भीड़ में घुप्प से ग़ुम हो जाती है।

अभी अभी जवान हुई एक लड़की

अपने भीतर ही बसे एक पुराने शहर से होकर गुजरती है

जैसे एक हुजूम गुजरता है किसी दरगाह से उर्स के दिनों में

उतरती है किसी उदास नदी के किनारे

सीढ़ियों से

अपने ही अंदर डूब जाने के लिए

अभी अभी जवान हुई एक लड़की को

पिछली दिनों लोलार्क कुण्ड पर नहान को गयी औरतों ने

पानी के भीतर बैठकर मछलियों से बात करते हुए देखा है।

अभी अभी जवान हुई लड़की ने अपने पाँव में एक जिद को बाँध रखा है।

अभी अभी जवान हुई लड़की

चाहती है

बनारस को ठंडई की ग्लास में उतारकर किसी चौराहे पर पी जाए

हज़ारों बरस बूढ़ा बनारस चाहता है

अभी अभी जवान हुई लड़की को जी जाए

अरमान

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