Saturday, 20 January 2018
स्मगलर -(कहानी)- शशि कुमार सिंह
Tuesday, 21 November 2017
वादापूर्ति शशि कुमार सिंह
वादापूर्ति
देश की संसद में बड़े ही अहम मुद्दे 'धर्मोत्थान और सरकार का दायित्व' विषय पर बहस हो रही थी.सत्ताधारी सनातन दल का कहना था कि,''सरकार ने इतने कम समय में अपने सारे वादे पूरे कर दिए.जनता बड़ी खुशहाल है.अब उसे करने के लिए कोई नया प्रोजेक्ट चाहिए.''
अध्यात्म मंत्री ने कहा,''किसी भी समाज का वास्तविक विकास उसके आध्यात्मिक उत्थान में निहित है.यदि सरकार चाहे तो मैं बहुमूल्य सुझाव दूं.भगवान् राम की 100 मीटर ऊँची प्रतिमा स्थापित की जाए.''
रोजगार मंत्री ने कहा,''मैं अध्यात्म मंत्री की बात का समर्थन करता हूँ.देश की जनता को उनके गौरव का बोध कराना अति आवश्यक है.''
संसद ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि भगवान् राम की प्रतिमा स्थापित होगी और उसकी लम्बाई 100 मीटर होगी.सिर्फ सर्वहारा दल ने इसका विरोध किया.सभी माननीय सदस्यों ने सर्वहारा दल के सदस्य की तरफ मुँह करके 'शेम शेम' का जयघोष किया.
अनुदार दल के नेता ने कहा,''सरकार का यह कदम स्वागत योग्य है.मगर मैं इससे प्रसन्न नहीं हूँ.''
सभी सदस्यों ने दलीय भावना से ऊपर उठकर पूछा, ''क्यों, माननीय सदस्य को इसमें क्या आपत्ति है?स्पष्ट करें.''
अनुदार दल के नेता ने अपनी आपत्ति को स्पष्ट करते हुए कहा, ''देखो हमारी संस्कृति संयुक्त परिवार की पक्षधर है.हमारे आराध्य भगवान् राम का भी संयुक्त परिवार में विश्वास है.वे संयुक्त परिवार में ही जन्में, पले और बढ़े भी.इसलिए सिर्फ भगवान् राम की ही नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार की प्रतिमा स्थापित हो.''
रोजगार मंत्री ने हनुमान, सुग्रीव, अंगद, विभीषण, नल और नील की भी प्रतिमा स्थापित करने का सुझाव दिया.
स्वास्थ्य मंत्री ने इसके लिए अस्पतालों की भूमि दान में देने की भी घोषणा की.
शिक्षा मंत्री का भी कहना था कि विश्वविद्यालयों से सिर्फ देशद्रोही पैदा हो रहे हैं.इसलिए विश्विद्यालयों की भूमि का भी इस्तेमाल इस धार्मिक अनुष्ठान में किया जा सकता है.
थोड़ी आनाकानी के पश्चात् ये सारे प्रस्ताव पारित हो गए.
'मुस्लिम अवाम मजलिस' के अध्यक्ष ने भी फ़रमाया, ''वैसे तो हम बुतपरस्ती के सख्त खिलाफ हैं मगर हमें भी अपनी कौम को मुँह दिखाना है.हम चाहते हैं कि हमारी कौम के लिए बहुमंजिला मस्जिद बने.हमें त्योहारों में नमाज़ पढ़ने में परेशानी होती है.सड़कों पर पढ़ना पड़ता है.सदन यह भी ख्याल रखे कि शिया और सुन्नी की मस्जिदों की संख्या बराबर न हो और इन मस्जिदों के दरम्यान पर्याप्त दूरी हो.''
धर्मनिरपेक्षता नहीं बल्कि पंथनिरपेक्षता का हवाला देते हुए सदन ने यह प्रस्ताव भी पारित कर दिया.
आदिम जनजाति अधिकार मोर्चा के सदस्य ने कहा,''देखिये हम आप सबकी आस्था का ख्याल रखते हैं.हमारी भी आस्था का ख्याल रखा जाए, हम भी अपनी कौम के बीच जायेंगे, तो क्या मुँह दिखाएँगे?अतः मैं सदन से निवेदन करता हूँ कि हमारे आराध्य इष्टासुरजी की प्रतिमा भी स्थापित की जाए.''
सिखों, ईसाइयों और बौद्धों को भी अपनी-अपनी कौम को मुँह दिखाना था, इसलिए उनकी मांगें भी मान ली गयीं.
सर्वहारा दल के नेता ने कहा, ''हमें भूख और गरीबी की प्रतिमा स्थापित करनी चाहिए.हम इक्कीसवीं शताब्दी में धार्मिक मसलों में उलझे हुए हैं.जबकि किसी भी ईश्वर या अल्लाह का कोई अस्तित्व नहीं है.सब हमारी कल्पना की उपज हैं.हमें स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय,अस्पताल आदि स्थापित करने के लिए जनता ने चुना है.और हम यहाँ मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर में उलझे हुए हैं.आप सभी माननीय सदस्यों से निवेदन है कि कृपया हमें इस बात से अवगत कराएं कि क्या आपने जनता से यही वादा किया था?''
अध्यक्ष समेत सदन के सभी माननीय सदस्य चौंके.मार्शल तो अपनी हँसी नहीं रोक पा रहे थे.
सर्वहारा दल के नेता की बात सुन सनातन धर्म के नेता आपे से बाहर हो गए.उन्होंने सबसे पहले उन्हें 'देशद्रोही' की उपाधि से नवाजकर उनके इस कृत्य की भर्त्सना की.पाकिस्तान जाने की सलाह देते हुए और साथ ही अपना मेनिफेस्टो हवा में लहराते हुए सदन को अपनी ओजस्वी वाणी से कम्पायमान करते हुए कहा, ''धर्म के खिलाफ तुम्हारी एक बात भी बर्दाश्त नहीं की जायेगी.तुमने असंसदीय भाषा का प्रयोग किया है.तुम्हें माफी मांगनी होगी.और देखो हमने लिखित में जनता से वादा किया है कि हम मंदिर बनायेंगे.मूर्ति-निर्माण उसी का हिस्सा है....यहाँ तक कि हमने श्मशान और कब्रिस्तान का भी वादा लिखित रूप में किया है.हमारे यहाँ सब कुछ लिखित रूप में रहता है.हमारा मेनिफेस्टो पारदर्शी है.और ये मेनिफेस्टो नहीं अपितु हमारे लिए 'संकल्प पत्र'है.बल्कि मैं तो यह कहूँगा कि हम बहुमत में हैं इसलिए हमें सिर्फ मूर्ति ही नहीं अनेक मंदिर निर्माण की भी अनुमति मिले.''
अनुदार दल के नेता ने ललकारते हुए सनातन दल के नेता की कायरता पर क्षोभ प्रकट किया,''आपसे कुछ नहीं होगा.आप सदन और सदन के बाहर बहुमत में हैं.आपको किससे अनुमति लेनी है?जाकर चूड़ियाँ पहन लो.''
सभी माननीय सदस्यों ने कहा कि हम बहुत अहम मसले पर बहस करने के लिए एकत्र हुए हैं.यह आपस में लड़ने का समय नहीं है.हमें इस सर्वहारा दल के नेता के बारे में कुछ सोचना होगा.
'मुस्लिम अवाम मजलिस' के अध्यक्ष भी मज़हबविरोधी बातें सुनने को तैयार न थे.'लाहौल विला कूवत' का उच्चारण करते-करते वे अपनी जगह खड़े हो गए और उचककर सामने की मेज पर चढ़ने की कोशिश करने लगे.
सभी माननीय सदस्यों ने सर्वहारा दल के उस सदस्य के प्रति रोष प्रकट किया.सदस्यों के निवेदन पर अध्यक्ष ने मार्शलों को आदेश दिया कि वे सर्वहारा दल के उस अमाननीय सदस्य को उठाकर सदन से बाहर फेंक दें.मार्शलों ने अविलम्ब आज्ञा-पालन किया.
मूर्ति, मंदिर, मस्जिद आदि के लिए जगह की किल्लत को देखते हुए सदन ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया कि सभी स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालय, पुस्तकालय, अस्पताल आदि तोड़ दिए जाएँ.अस्पतालों के न रहने से.श्मशान और कब्रिस्तान भी गुलज़ार हो जायेंगे.सरकार का एक और लिखित वादा भी पूरा हो जाएगा.जनता भी इस आध्यात्मिक माहौल में प्रसन्न रहेगी.
समस्त माननीयों ने अपनी-अपनी कौमों को जाकर खुशी-खुशी मुँह दिखाया.कौमों ने प्रतिनिधियों के वादापूर्ति पर प्रसन्न होकर इतने जोर का जयकारा लगाया कि सभी मूर्तियों, मस्जिदों, गुरुद्वारों, गिरजाघरों आदि पर बैठे हुए पंछी उड़ गए.
Sunday, 8 October 2017
चिड़िया की आँख- शशि कुमार सिंह
चिड़िया की आँख
''अर्जुन तुम्हें चिड़िया की आँख दिख रही है?''
''हाँ गुरुजी दिख रही है.''
''और कुछ दिख रहा है?''
''ना गुरुजी.आपने कहा कि चिड़िया की आँख देखनी है तो बस मुझे चिड़िया की आँख ही दिख रही है.''
''बहुत खूब.मेरा आशीर्वाद है.बहुत आगे जाओगे.''
''धन्यवाद गुरुजी.''
''दुर्योधन तुम आओ.तुम्हें क्या दिख रहा है?''
''गुरुजी मुझे पेड़, डाली, पत्ते, फल, चिड़िया,घोंसले और आप लोग.सब कुछ दिख रहा है.''
''आँख नहीं दिख रही है?''
''आँख बहुत छोटी है न गुरुजी.इसलिए नहीं दिख रही है.''
''अर्जुन इसको समझाओ.इसकी आँख में ही कुछ खराबी है.प्रश्न भी ठीक से नहीं समझ रहा है.''
''देख भाई दुर्योधन गुरुकुल की भी पार्टी लाइन होती है.गुरुजी जो सुनना चाहते हैं, वही बोलना चाहिए.उनकी हाँ में हाँ मिलाना चाहिए.आगे जाने का यही मूल मन्त्र है.''
''मगर भाई सचमुच मुझे पेड़, डाली,पत्ते, फल, चिड़िया,घोंसले और आप लोग, सब कुछ दिख रहा था.चिड़िया भी दिख रही थी.मगर उसकी आँख तो बहुत छोटी थी.''
''तुम्हें कैसे समझाऊँ, जैसे मान लो, राजा धृतराष्ट्र कहें कि हस्तिनापुर में विकास दिख रहा है कि नहीं, तो मैं कहूँगा 'नहीं'.तुम क्या कहोगे?''
''मैं कहूँगा पिताजी अगर आपको दिख रहा है तो मुझे भी दिख रहा है.मैं साफ़-साफ़ देख रहा हूँ, दूर तक विकास हुआ है.पूरा हस्तिनापुर खुशहाल है.कहीं कोई समस्या नहीं है.''
''मगर क्या यह सच है?''
''ना.''
''सब समझते हो फिर भी.''
''क्या?''
''लोकतंत्र का गूढ़ रहस्य समझते हो.''
''हाँ, अब तो मैं गुरुकुल में आगे जाऊंगा ना?''
''अब कोई नहीं रोक सकता.''
शशि कुमार सिंह
Friday, 6 October 2017
मदरसा डे शशि कुमार सिंह
मदरसा डे
''बताइये हमारे यू.पी.में एक दिन बैग फ्री डे मन रहा है.इसके विरोध में हमारे विरोधी आज मदरसा डे मना रहे हैं.''
''माफी चाहूंगा सर.''
''हाँ माफ़ किया बोलो.''
''सर ये मस्जिद वाला मदरसा डे नहीं है.आज अंग्रेज़ी वाला मदर्स डे है.''
''अच्छा अच्छा.बताना चाहिए था न.ये नागपुर वाले गुरूजी फोन कर मुझे डांट रहे थे.उनको अंग्रेज़ी तो आती नहीं.जानना-समझना तो कुछ है नहीं.बस मुझे डांटते रहते हैं.बस डांट लो दो साल और.''
कर्मठता - शशि कुमार सिंह
कर्मठता
''भारतीय जनता से किये गए सारे वादे पूरे हो गए.पर मेरा कर्मठ मन अभी भी कुछ करने को बेताब है.क्या करूं प्रभु मेरा मार्गदर्शन करो.''
''हे भक्त तुम्हारा जन्म सिर्फ भारत भूमि का कष्ट हरने के लिए नहीं हुआ था.यहाँ तो शत-प्रतिशत तुमने अपना वादा निभा दिया.''
''फिर क्या करूं प्रभु?मैं कर्म के अभाव में मृत हो जाऊँगा.मुझे अविलम्ब कुछ करना है.मेरे हाथ पैर कर्म के अभाव में काँप रहे हैं.''
''भक्त तुम श्रीलंका जाओ और वहाँ 10 हज़ार मकान बनाओ क्योंकि अच्छे मकान के अभाव में सीताजी को अशोक वाटिका में रहना पड़ा था.यही तुम्हारी मेरे प्रति सच्ची भक्ति होगी.''
''जो आज्ञा प्रभु.''
''तथास्तु.''
राष्ट्र ऋषि सिंघल द्वीप में - शशि कुमार सिंह
राष्ट्र ऋषि सिंघल द्वीप में
''मेरे प्यारे श्रीलंकाई भाइयो और बहनो ! इस बार आपकी धरती पर कोई राजनेता नहीं आया है बल्कि एक राष्ट्र ऋषि आया है.राष्ट्र ऋषि की दीक्षा के उपरांत मैंने विदेश यात्रा के लिए श्रीलंका को चुना.यह दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का परिचायक है.भाइयो और बहनो बौद्ध धर्म से मेरा पुराना रिश्ता रहा है.सही बात तो यह है कि मैं भी बौद्ध धर्म में ही पैदा होना चाहता था.मगर अफ़सोस की बात नहीं है.मैं जन्मना नहीं धर्मना बौद्ध हूँ.आप जानते हैं कि भारत एक ऐसा देश है जहां धर्मों की गिनती करते हैं तो समूह में ही करते हैं.इस तरह धर्मों को याद करने में भी आसानी रहती है.हम बोलते हैं हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई.ये चारों एक साथ आते हैं.इसके बाद जैन और बौद्ध धर्म एक साथ.आप जानते हैं कि विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के अध्यक्ष जैन हैं.उनके साथ रहता कौन है?आपका राष्ट्रऋषि.एक जैन के साथ रहने वाला बौद्ध हुआ ना क्योंकि दोनों धर्मों की काउंटिंग एक साथ होती है.
आप मेजबान हैं.मैं मेहमान हूँ.दुनिया के कई देशों की यात्रा मैंने की, मगर इतना अपनापन मुझे कहीं नहीं मिला.कार्यक्रम के संचालक ने जब राष्ट्रऋषि के साथ मुझे संबोधित किया तो समझ लीजिये कि मेरा रोवां-रोवां भरभरा गया.मैं भोजपुरी इलाके से सांसद हूँ न इसलिए थोड़े भोजपुरी के शब्द आ जाते हैं.मैं एक बात मजाक में ही कह रहा हूँ आपके रावण ने हमारे देश की महिला का किडनैप किया.इतना लुच्चा आदमी कहीं देखा है आपने?यह लव जिहाद ही तो था.मगर आज हम इतने सक्षम हैं कि लव जिहाद करने की रावण की हिम्मत न पड़ती.आज आर.एस.एस., विश्व होन्दू परिषद् ,आदित्यनाथ जी की हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्य आपको बताते कि लव जिहाद वास्तव में होता क्या है?सारी लुच्चई भूल जाती.वैसे हमारे आर.एस.एस.ने गर्भ में ही बच्चे को सुसंस्कृत करने की सराहनीय पहल की है.हमारे यहाँ एक प्रदेश में, अरे उसी प्रदेश में जहां से मैं सांसद हूँ और जो राम की भी जन्मभूमि है, हाँ तो वहाँ हमने रामराज्य लाने की प्रयोगशाला या कार्ययोजना के तहत एंटी रोमियो स्क्वाड चालू किया है.अब किसी लुच्चे की हिम्मत नहीं पड़ती.मगर आपके यहाँ तो एंटी जूलियट स्क्वाड चालू करना होगा क्योंकि यहाँ उलटे शूर्पनखा जैसी लड़कियां ही छेड़ती हैं.
भाइयो और बहनो आप लोग बुरा तो नहीं मान रहे हैं न ?अरे ऋषियों के कडवे प्रवचन लाभदायक होते हैं.रावण के लोग ऐसे ही लोगों को पकड़कर खा जाते थे.यह पूरा श्रीलंका चलता फिरता स्लोटर हाउस ही तो है.मगर अब ऐसे नहीं चलेगा.अब भारत के पड़ोस में ऐसा नहीं चलेगा.अब सभी को लाइसेंस लेने होंगे.यहाँ के सभी पशुओं का विशेष रूप से गोमाता का आधार कार्ड बनेगा.और हम इस मामले में आपकी पूरी मदद करेंगे.हम अपने यहाँ भी यह योजना लागू कर रहे हैं.
रावण के दूसरे राजनीतिक दलों के साथ संबंधों की जांच होगी.जरूर उसका सम्बन्ध कांग्रेस से था.नहीं तो इतनी बड़ी सोने की लंका.असंभव है.
भाइयों और बहनो मेरा तो हिंसा में कतई विश्वास नहीं है.कभी था भी नहीं.जो कुछ बात आप लोगों के कानों तक पहुँची होगी, वह सब विपक्ष और विपक्षी मीडिया की वजह से.इस पाप भूमि में हमारे यहाँ से हनुमानजी आये थे.क्या किया था याद है न?पूरी लंका को तहस-नहस कर दिया था.मैं भी कर सकता हूँ क्योंकि मेरे भक्त भी मुझे हनुमान से कम नहीं मानते.मगर मैंने कहा न मेरा हिंसा में कतई विश्वास नहीं है.सहारनपुर से कुछ ख़बरें आ रही थीं.हमने निंदा की.मन थोड़ा घूमने का हुआ तो मैं आ गया भगवन बुद्ध की शरण में.वैसे बुद्धं शरणम गच्छामि वाले लोग मुझे बहुत पसंद हैं.अम्बेडकरजी से हम कितना प्रेम करते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है.हम चाहते हैं कि हमारी पार्टी की शाखा यहाँ भी खुले .विभीषणजी को इस सिंघल द्वीप का अध्यक्ष बनाऊँ.मैं आकर यहाँ चुनाव में रोड शो करूं.इस तरह से दोनों देशों के सम्बन्ध मजबूत बनें और आप लोग भी सभ्य और सुसंस्कृत बनें.आप के देश में भी जो भिन्न भाषा, भिन्न संस्कृति, भिन्न देश, भिन्न रहन-सहन के लोग रहते हैं, उनको इस देश से खदेड़ कर बाहर किया जाए.अरे भाई आपका इतिहास अलग है.आपका भूगोल अलग है तो फिर आप देशभक्त कैसे हुए?आप तो घुसपैठिये हैं.आप देश के गद्दार हैं.इनसे निजात बी.जे.पी. ही दिलायेगी.यहाँ बड़ी संख्या में बी.जे.पी. और आर.एस.एस.की शाखा खुले.बी.जे.पी. सत्ता में आये, मेरा वादा है आप सभी के अच्छे दिन जरूर आयेंगे.पुनः आप हमें शीघ्र बुलाइएगा.आपने हमें इतने ध्यान से सुना.खूब तालियाँ बजाईं.बहुत-बहुत धन्यवाद.अब मैं ऋषि वाणी को विराम देता हूँ.''
आत्मनिर्भर शशि कुमार सिंह
आत्मनिर्भर
''रोको रोको जल्दी रोको नहीं तो गाय-गाय चिल्लाऊंगा फिर समझ लेना.दिखाओ ट्रक में क्या है?''
''कुछ नहीं साहब कचरा है.फेंकने जा रहा हूं.''
''ठीक है दिखाओ.''
''ठीक है साहब.''
''अरे ये तो नेताजी लोग लग रहे हैं.तुम कह रहे हो कचरा है.''
''एक ही बात है सर.''
''तुम इनका महत्व नहीं समझोगे.हम 'मेक इन इंडिया' के तहत कचरे से बिजली बनायेंगे.देश को बिजली की तत्काल आवश्यकता है.''
''मगर साहब ये लोग तो भ्रष्ट और देशद्रोही पार्टी में रहे हैं.आप भ्रष्ट और देशद्रोहियों को अपनी पार्टी में लेकर अपनी पार्टी को क्यों अशुद्ध कर रहे हैं.''
''देखो मूल चीज है आत्मा.अब अगर इनकी आत्मा कह रही है कि वह पार्टी इनके लिए ठीक नहीं थी.हमारी पार्टी ठीक है तो हम इनका स्वागत करते हैं.हम इनका हल्का सा बौद्धिक करेंगे.फिर तुम भी नहीं पहचान पाओगे.ये हमसे भी बड़े देशभक्त और ईमानदार हो जायेंगे.देशभक्ति और ईमानदारी भी एक नशा है, बस लगने की देर है.इन्हें भी लग जायेगा.''
''बिलकुल साहब आप जैसा देशभक्त और ईमानदार मैंने नहीं देखा.....ठीक है साहब जल्दी ट्रक से कचरा ले जाइए और बिजली बनाइये.''
''बिलकुल हम कचरे से बिजली बनाकर समूचे देश में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहे हैं.''
राष्ट्रऋषि घर पर हैं?'
'राष्ट्रऋषि घर पर हैं?'
''राष्ट्रऋषि घर पर हैं क्या?''
''आप लोग कौन हैं, क्या काम है?''
''हम लोग देशभक्त हैं और उससे ज्यादा राष्ट्रऋषि के भक्त हैं. हम पूछने आये हैं कि पाकिस्तान पर हमला कब करना है.''
''राष्ट्रऋषि विश्राम कर रहे हैं .जब से बिहार होकर आये हैं तब से बस सो रहे हैं.जब नींद खुलती है तो गाते हैं, 'डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है' और फिर चिर निद्रा में चले जाते हैं.''
''बिहार किस काम से गए थे?''
''कह रहे थे कि पार्टी का काम है.''
''अरे ऋषिवर कहीं पार्टी के काम से जाते हैं तो रोड शो करते हैं जिसका प्रसारण न्यूज़ चैनल पर होता है.''
''अच्छा फिर.''
''मुझे तो संदेह हो रहा है कि कहीं राष्ट्रऋषि बिहार की उस पार्टी में तो नहीं गए जिसमे लाखों लीटर.''
''हे भगवान् मतलब राष्ट्रऋषि झूठ बोल रहे थे.वे चूहों...''
''हम लोग नहीं कह रहे कि राष्ट्र ऋषि चूहा''
''देखिये आप लोग कहें न कहें मैं तो राष्ट्र ऋषि को जानती हूँ न.उनके यहाँ बहुत दिनों से काम कर रही हूँ.आपके राष्ट्रऋषि न फऊंकते बहुत जादा हैं.उनसे कुछ होता जाता नहीं.''
दूसरा आर एस एस - शशि कुमार सिंह
दूसरा आर.एस.एस.
''भाइयो और बहनो आप लोग आर.एस.एस.का फुल फॉर्म जानते हैं ?नहीं न.मैं बताऊंगा.एक आर.एस.एस.की स्थापना १९२५ में हुई थी.''
''कौन आर.एस.एस.?''
''अरे वही जिसने हमें आज़ादी दिलाई.''
''एक की स्थापना हुई थी, मतलब दूसरा आर.एस.एस.भी है?''
'' खा गए न गच्चा?अच्छा बताओ मुझे प्रधानसेवक किसने बनाया?''
''किसने?''
''अरे वही हमारे मासूम भक्त .''
''ऋषिवर थोड़ा स्पष्ट करें न.इतनी क्लिष्ट शैली हमें समझ में नहीं आती.''
''ये हुई न मुद्दे वाली बात.देखो भक्त कहने से हमारे फ़ॉलोवर, हमारे ब्लाइंड सपोर्टर, नाराज होते थे.अब वे 'राष्ट्रऋषि सेवक संघ' का गठन कर लेंगे.तो हुआ न दूसरा आर.एस.एस.''
''वाकई ऋषिवर सिद्ध पुरुष हैं.''
उपहार
उपहार
''स्मृतिजी आपने २०१३ में तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को चूड़ियाँ भेजने के लिए कहा था.याद है न.''
''हाँ हाँ याद है.कैसे भूल सकती हूँ. मैं सच्ची भारतीय हूँ.कितना बड़ा नक्सली हमला हुआ था आपको याद है न..हमारे कितने जवान शहीद हुए थे.ये कोई कैसे भूल सकता है.''
''मैडम इतिहास अपने को दुहरा रहा है....आज के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आप क्या भेजना चाहेंगी?''
''देखिये आपने तो मुझे धर्म संकट में डाल दिया.खैर मैं सच्ची भारतीय हूँ.भले ही मेरा सरनेम ईरानी हो.देश का सवाल है, मैं पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बात करूंगी.कोई उपहार अपनी हैसियत के हिसाब से ही दिया जाता है.उस समय मैं किसी पोस्ट पर नहीं थी.इसलिए सिर्फ चूड़ियाँ भेज पाई.आज तो मैं कपड़ा मंत्री हूँ.इसलिए पूरा साड़ी, साया, ब्लाउज, मेकअप का सामान और चूंकि मेरा सम्बन्ध फिल्म और कला जगत से है इसलिए एक ढोलक भी भेजूंगी.''
''अरे वाह मैडम आप तो वाकई देशभक्त हैं.''
''और नहीं तो क्या मुझे शिक्षा मंत्री बनाकर हटा दिया.क्या मैं गलत चला रही थी.''
राष्ट्र ऋषि शशि कुमार सिंह
राष्ट्र ऋषि
''प्रधान मंत्री जी बधाई हो.आप तो राष्ट्र ऋषि हो गए.''
.''हाँ मगर ये बात कोई ऋषि ही समझ सकता है.राष्ट्र को रामदेवजी का कृतज्ञ होना चाहिए ''
''इसलिए कि उन्होंने एक राज्य ऋषि को राष्ट्र ऋषि बना दिया?''
''नहीं यह तो तुम राष्ट्र का अपमान कर रहे हो.मैं कभी भी राज्य ऋषि नहीं रहा. मैं तो सदैव से अन्तराष्ट्रीय स्तर और चिन्तन का महापुरुष हूँ.वसुधैव कुटुम्बकम हमारी परंपरा रही है.''
''सर यह सम्मान तो भारत रत्न और नोबेल से भी बड़ा है.''
''देखो भारत रत्न तो पक्का है.आज नहीं तो कल.रही बात नोबेल की तो नोबेल की बात ही कुछ और है.चक्कर में हूँ कि मिल जाए.''
''सर कश्मीर में जवानों के सर काट लिए गए.''
''अब तुम्ही बताओ.मनमोहन के समय सिर्फ एक सर कटा था.हमने कहा मेहमान के दोनों हाथ भरे होने चाहिए.इसलिए दो सर काटकर दे दिए.''
''सर इस पर भारत सरकार कोई एक्शन?''
''देखो पहले तो हमारी सरकार इस घटना की घोर निंदा करती है.पहले भी कर चुकी है.हमारे सुयोग्य मंत्री भी हिन्दी और अंग्रेजी में कई बार भिन्न प्रकार से निंदा कर चुके हैं.एक बार पुनः हमारी सरकार निंदा करती है.ये शहीद देश के काम आये हैं.इनकी शहादत बेकार नहीं जायेगी.''
''मतलब सर पाकिस्तान पर हमला?''
''देखो भारत हमेशा से एक शांति प्रिय और अहिंसक देश रहा है और मेरा कभी भी हिंसा में विश्वास नहीं रहा है.''
''सर २००२ में भी नहीं.''
''पहले थोडा बहुत था मगर अब नहीं अब तो मेरा ऋषित्व जग गया है.ह्रदय परिवर्तन तो कभी भी हो सकता है न?सम्राट अशोक का नहीं हुआ?''
''मगर सर.''
''क्या मगर सर.मगर सर.इस समय मगर पर नहीं गाय पर बात करनी हो तो करो.तीन तलाक पर कुछ पूछना हो तो पूछ सकते हो.''
''सर हमला कब तक?''
''अरे कुछ २०१९ के लिए भी छोड़ दो.''
''सर तब भी कुछ योग?''
''इस समय सिर्फ राजयोग.''
''मगर सर.''
''फिर वही मगर सर मगर सर कर रहे हो.मैं ऋषि हूँ.कोई सर नहीं.अभी प्रकृति का आनंद लेने दो.रामदेव जी इस पत्रकार को पवित्र गोमूत्र की प्रयोगशाला की ओर विचरण कराइए.यह हमें हिंसक बनाना चाहता है.जय केदारनाथ जी.इस समय देशवासियों को सद्बुद्धि और धैर्य प्रदान करें और हमारे भक्तों को इनका सामना करने की शक्ति.''
''एक बार सब बोलो राष्ट्र ऋषि जी की जय.केदारनाथ जी की जय.बद्रीनाथ जी की जय.''
''रामदेवजी एक बात कहनी है.''
''आदेश करिए राष्ट्र ऋषि ''
''हमारे अध्यक्ष जी को भी कोई उपाधि''
''ठीक है हो जायेगा ये कौन सी बड़ी बात है.हो जाएगा.मगर अध्यक्षजी इस समय कर क्या रहे हैं.''
''कुछ नहीं इस समय दोनों खाली थे.इसी समय तो थोडा खाली समय मिला है नहीं तो सदैव चुनावों में व्यस्तता.थोड़ी फुर्सत मिली तो मैं इधर प्रकृति का आनंद लेने आया और वो एम्.सी.डी.चुनावों में जीत का जश्न.''
''एक बार फिर बोलो राष्ट्र ऋषि की जय.केदारनाथजी की जय.बद्रीनाथजी की जय.''
ब्रेकिंग न्यूज़' शशि कुमार सिंह
'ब्रेकिंग न्यूज़'
''सेक्रेटरी जरा न्यूज़ लगाओ देखो ए.के.49 कहाँ पहुंचा. देखो ब्रेकिंग न्यूज़ आ रहा होगा-'केजरीवाल का कॉलर फटा.'
''मुख्यमंत्री को घसीटते हुए तिहाड़ तक ले गए बर्खास्त मंत्री.''
''राजनेता का सिंघम अंदाज देख लोग दंग''
''सभी बनाते रहे वीडियो, नहीं सुनी किसी ने सी.एम.की चीख पुकार.''
''सर एन.डी.टी.वी.पर तो सहारनपुर आ रहा है.ये तो न्यूज़ नहीं है.''
''जी न्यूज़ लगाओ.''
''सर इसमें तो आपकी 'श्रीलंका यात्रा की उपलब्धियां'कार्यक्रम आ रहा है.''
''उफ़ इस बाभन पर पूंजी निवेश करना लगता है बेकार जाएगा.अच्छा सुनो चोली में कॉलर नहीं होता ना?''
''नहीं सर.क्यों?''
''थैंक गॉड.कुछ नहीं किसी भारतीय नागरिक ने उपहार में भेजा था न, इसलिए पूछ रहा था.''
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