विश्व हिन्दी साहित्य
साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
Sunday, 9 February 2014
फैशन-अरमान आनंद
कितने ओल्ड फैशन भूत हो
मेरा दिल खाना चाहते हो
आजकल तो सब दिमाग चबाना पसंद करते हैं...
No comments:
Post a Comment
Newer Post
Older Post
Home
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Featured post
अरमान के शेर
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
कुँवर नारायण की रचना आत्मजयी आज के मनुष्य को बेहतर अभिव्यक्ति देने का एक बेहतर उदाहरण है : अरुणाभ सौरभ
कुँवर नारायण की आत्मजयी को प्रकाशित हुए पचास साल से ज्यादा हो चुके हैं। इन पचास सालों में कुँवर जी ने कई महत्त्वपूर्ण कृतियों से भारतीय भा...
बनारस के बुनकरों पर राहुल वज्रधर की कविता खेत में संस्कृति
खेत में संस्कृति -------------------------------------------------------------- साहब!खेती करते देखा है बुनकरों को खेतों में नहीं साड़ी म...
धान रोपती हुई औरतों पर कविताएँ
धान रोपती हुई औरतों पर कविताएँ 1 धान रोपती स्त्री - विश्वनाथ प्रसाद तिवारी --------------------------------------...
No comments:
Post a Comment