व्याकरण
भाषा का हो या समाज का
व्याकरण
सिर्फ हिंसा सिखाता है
व्याकरण पर चलने वाले लोग
सैनिक का दिमाग रखते हैं
प्रश्न करना
जिनके अधिकार क्षेत्र से बाहर की चीज़ है
और
हिंसा
एक आदेश
व्याकरण की रक्षा करना
भविष्य और संभावनाओं हत्या करना है
अरमान आनंद
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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