किसी को जाते हुए देखना भी खूबसूरत हो सकता है
.
देखो
दुःख दूर जा रहा है
.
जाना
हमेशा खौफनाक क्रिया नहीं होती
अरमान
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
Featured post
-
चोर (लघुकथा) डॉ. अरमान आनंद 'शांति विहार' अपने नाम की तरह ही एक बेहद शांत और संभ्रांत कॉलोनी थी। वहाँ कुल सात परिवार रहते थे, जो रो...
-
काजल बिल्कुल नई कवयित्री हैं। दिनकर की धरती बेगूसराय से आती हैं। पेशे से शिक्षिका हैं। इनकी कविताओं में एक ताज़गी है। नए बिम्ब और कविता म...
No comments:
Post a Comment