विश्व हिन्दी साहित्य
साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
Tuesday, 8 August 2017
मेरे शेर अरमान
बस्तियां दिल की तन्हा बसर नहीं होती
मुहब्बत कभी अकेले असर नही होती
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