Thursday, 27 July 2017

अंतरात्मा

अंतर आत्मा(कविता)
.....................
सुना है
आत्माएं
अकेली रातों में
खंडहर की टूटी मुंडेरों पर गुनगुनाती हैं
पायल
बजाती हुई
अक्सर अनजाने राहगीर को बुलाती हैं
आत्माएं
अतृप्त होती हैं
चांदनी रातों में
सफ़ेद गाउन पहने
महल की खिड़कियों से दिख जाती हैं
आत्माएं
खूबसूरत और डरावनी होती हैं
मासूम आत्माएं
तांत्रिकों के लिए व्यवसाय हैं
गप्पीयों के लिए कहानियां हैं
राजनीतिज्ञों के लिए
समय समय पर इस्तेमाल में आने वाली चीज़ हैं
वे इसे अंतरात्मा पुकारते हैं
अरमान

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