साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
पान पर शेर
प्रेम में आह वो पान का कुचला जाना लाली होठ पर आई तो मगर कुर्बान होकर
अरमान
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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