Saturday, 1 June 2013

प्रेम कविता9

मैं
प्यार में हूँ
मैं तब भी था
जब तुम नहीं थी
जब कुछ भी नहीं था
मेरा जन्म ही प्यार से और प्यार के लिए हुआ है
दुनिया का सारा संघर्ष इसी के लिए तो है
सारे दर्शन इसी से तो हैं
मैं रहूँगा
प्यार में हमेशा
अनंत कालों तक
तुम्हें आना होगा
बार बार
जब भी प्यार बुलाएगा।...
अरमान

No comments:

Post a Comment

Featured post

चोर

चोर  (लघुकथा) डॉ. अरमान आनंद 'शांति विहार' अपने नाम की तरह ही एक बेहद शांत और संभ्रांत कॉलोनी थी। वहाँ कुल सात परिवार रहते थे, जो रो...