साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
सवाल
सवाल महफ़िल में किसी बच्चे की तरह बार बार उठ खड़ा होता है लोग नाच के नशे में चिल्लाते हैं
बैठ जाओ बैठ जाओ
अरमान
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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