साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
पहली बार महसूस हुआ
कि बेटी से विदा लेना
उसकी माँ से विदा लेने से
ज्यादा पीड़ादायक होता है।
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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