साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
ये जो सुलगती सिगरेट को मशाल की तरह उठाये हुए है जो शख्स जिंदगी को धुएं में उड़ाए हुए
खेत में खुशियाँ उगाने हेंगा चला कर आया है
रंजो गम ने पूछा पता ठेंगा बता आया है
सभ्यता जिसके शहर में बदनाम है अनिल यादव उसका नाम है
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