Sunday, 25 June 2017

प्रिय अनिल यादव के लिए कविता

ये जो सुलगती सिगरेट को
मशाल की तरह उठाये हुए
है जो शख्स
जिंदगी को धुएं में उड़ाए हुए

खेत में खुशियाँ उगाने
हेंगा चला कर आया है

रंजो गम ने पूछा पता
ठेंगा बता  आया है

सभ्यता जिसके शहर में बदनाम है
अनिल यादव उसका नाम है

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