साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
माँ गंगा हमें क्षमा करना हम मनुष्य बिच्छुओं के वंशज हैं हम अपनी जननी को ही खा जाते हैं और हम सुरक्षा देने वाले साधू को भी डस लेते हैं
अरमान आनंद
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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