साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
ये
मेरा ह्रदय है
साफ़ शीशे की तरह
तलब हो तोड़ने की
तो बेशक तोड़ो
मगर
तुम्हारे हाथ में दस्ताने
पांव में चप्पल
और
सलामती की दुआ
तीनों
निहायत जरुरी हैं।
######अरमान#######
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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