साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
ध्येय
लो तोड़ो
मेरा दिल तोड़ो
लो खेलो
मेरे दिल से खेलो
तुम्हें आनंद मिलता है
है ना
और मुझे सुकून
क्योंकि
तुम्हारी ख़ुशी ही
ध्येय है मेरा
मेरे प्रेम का। ********अरमान********
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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