तुम
एक गिरी हुई गाछ
तुम पर चढ़े हुए
सहलाते लिपटते हुए
और जोर जोर से हुमंचते हुए
कुछ बच्चे
और
अपनी बालकनी में
खड़ा मैं
अपनी टांगों को आपस में उलझाकर
सोचता हूँ
काश!
तुम
मेरे हाते में गिरी होती।
******@अरमान@*****
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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