साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
आज
एक चिड़िया ने
मार दी है सोने की कटोरी को लात
लहूलुहान चोंच से तोडा है चांदी का पिंजरा
और लगा दी है छलांग
अंतहीन में
मालिक नाम का जीव
सर धुनते हुए खोज रहा है
बन्दूक
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
No comments:
Post a Comment