आसमान से झड़ते हैं शब्द
धरती से टकरा कर
सन्तूर से बजते हैं
सुनना
किसी खाली रात में जब तुम्हारा सीना
आसमान की तरह सजल बादलों से भरा हो
सुनना उसे
जैसे
पड़ोस की छत पर बजते रेडियो को सुनते हो
महसूस करना
जैसे न
होकर भी तुम्हारे पास कोई होता है
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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