Saturday, 25 August 2018

सुशांत कुमार शर्मा की कविता 'तेलिया मसान'

मदारी आता
खींचता सीवान
जिस हड्डी से
कहता उसे तेलिया मसान
कागज को करता रुपया
मिट्टी को करता सिक्का
तिनके को बना देता कबूतर
पानी में लगाता आग
तालियां बजतीं
तमाशा खूब जमता
समेटकर तिलस्मी बक्सा और झोला
मदारी चला जाता
रह जाते थे वहां पर
कागज़ , मिट्टी , तिनके , पानी
तेलिया मसान की हड्डी के घेरे में
बिखरे हुए ।
मदारी खूब जानता था
तेलिया मसान की हड्डी से
जिंदा हड्डियों को साधना
नजरबंद के खेल में
हाथ की सफाई में
तेलिया मसान की हड्डी
बड़े काम् की चीज़ है
हर दौर का मदारी यह जानता है
कि दधीचि को कैसे बनाना है
तेलिया मसान ।

सुशांत कुमार शर्मा

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