विश्व हिन्दी साहित्य
साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
Sunday, 3 April 2016
शहर लीलाधर मंडलोई
शहर में जब नहीं मिले
सोगहक नरम मूली
बथुआ का साग
पापड़
और चूल्हे से उतरते गरम-गरम फुल्के
गाँव से आये पिता
लौट गये बाज़ार ऐसा ना था कि रोक सके
पृष्ठ ७१ लिक्खे में दुःख
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