Friday, 6 October 2017

मदरसा डे शशि कुमार सिंह

मदरसा डे

''बताइये हमारे यू.पी.में एक दिन बैग फ्री डे मन रहा है.इसके विरोध में हमारे विरोधी आज मदरसा डे मना रहे हैं.''
''माफी चाहूंगा सर.''
''हाँ माफ़ किया बोलो.''
''सर ये मस्जिद वाला मदरसा डे नहीं है.आज अंग्रेज़ी वाला मदर्स डे है.''
''अच्छा अच्छा.बताना चाहिए था न.ये नागपुर वाले गुरूजी फोन कर मुझे डांट रहे थे.उनको अंग्रेज़ी तो आती नहीं.जानना-समझना तो कुछ है नहीं.बस मुझे डांटते रहते हैं.बस डांट लो दो साल और.''

कर्मठता - शशि कुमार सिंह

कर्मठता

''भारतीय जनता से किये गए सारे वादे पूरे हो गए.पर मेरा कर्मठ मन अभी भी कुछ करने को बेताब है.क्या करूं प्रभु मेरा मार्गदर्शन करो.''
''हे भक्त तुम्हारा जन्म सिर्फ भारत भूमि का कष्ट हरने के लिए नहीं हुआ था.यहाँ तो शत-प्रतिशत तुमने अपना वादा निभा दिया.''
''फिर क्या करूं प्रभु?मैं कर्म के अभाव में मृत हो जाऊँगा.मुझे अविलम्ब कुछ करना है.मेरे हाथ पैर कर्म के अभाव में काँप रहे हैं.''
''भक्त तुम श्रीलंका जाओ और वहाँ 10 हज़ार मकान बनाओ क्योंकि अच्छे मकान के अभाव में सीताजी को अशोक वाटिका में रहना पड़ा था.यही तुम्हारी मेरे प्रति सच्ची भक्ति होगी.''
''जो आज्ञा प्रभु.''
''तथास्तु.''

राष्ट्र ऋषि सिंघल द्वीप में - शशि कुमार सिंह

राष्ट्र ऋषि सिंघल द्वीप में

''मेरे प्यारे श्रीलंकाई भाइयो और बहनो ! इस बार आपकी धरती पर कोई राजनेता नहीं आया है बल्कि एक राष्ट्र ऋषि आया है.राष्ट्र ऋषि की दीक्षा के उपरांत मैंने विदेश यात्रा के लिए श्रीलंका को चुना.यह  दोनों देशों के रिश्तों की मजबूती का परिचायक है.भाइयो और बहनो बौद्ध धर्म से मेरा पुराना रिश्ता रहा है.सही बात तो यह है कि मैं भी बौद्ध धर्म में ही पैदा होना चाहता था.मगर अफ़सोस की बात नहीं है.मैं जन्मना नहीं धर्मना बौद्ध हूँ.आप जानते हैं कि भारत एक ऐसा देश है जहां धर्मों की गिनती करते हैं तो समूह में ही करते हैं.इस तरह धर्मों को याद करने में भी आसानी रहती है.हम बोलते हैं हिन्दू, मुस्लिम, सिक्ख, ईसाई.ये चारों एक साथ आते हैं.इसके बाद जैन और बौद्ध धर्म एक साथ.आप जानते हैं कि विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के अध्यक्ष जैन हैं.उनके साथ रहता कौन है?आपका राष्ट्रऋषि.एक जैन के साथ रहने वाला बौद्ध हुआ ना क्योंकि दोनों धर्मों की काउंटिंग एक साथ होती है.
आप मेजबान हैं.मैं मेहमान हूँ.दुनिया के कई देशों की यात्रा मैंने की, मगर इतना अपनापन मुझे कहीं नहीं मिला.कार्यक्रम के संचालक ने जब राष्ट्रऋषि के साथ मुझे संबोधित किया तो समझ लीजिये कि मेरा रोवां-रोवां भरभरा गया.मैं भोजपुरी इलाके से सांसद हूँ न इसलिए थोड़े भोजपुरी के शब्द आ जाते हैं.मैं एक बात मजाक में ही कह रहा हूँ आपके रावण ने हमारे देश की महिला का किडनैप किया.इतना लुच्चा आदमी कहीं देखा है आपने?यह लव जिहाद ही तो था.मगर आज हम इतने सक्षम हैं कि लव जिहाद करने की रावण की हिम्मत  न पड़ती.आज आर.एस.एस., विश्व होन्दू परिषद् ,आदित्यनाथ जी की हिन्दू युवा वाहिनी के सदस्य आपको बताते कि लव जिहाद वास्तव में होता क्या है?सारी लुच्चई भूल जाती.वैसे हमारे आर.एस.एस.ने गर्भ में ही बच्चे को सुसंस्कृत करने की सराहनीय पहल की है.हमारे यहाँ एक प्रदेश में, अरे उसी प्रदेश में जहां से मैं सांसद हूँ और जो राम की भी जन्मभूमि है, हाँ तो वहाँ हमने रामराज्य लाने की प्रयोगशाला या कार्ययोजना के तहत एंटी रोमियो स्क्वाड चालू किया है.अब किसी लुच्चे की हिम्मत नहीं पड़ती.मगर आपके यहाँ तो एंटी जूलियट स्क्वाड चालू करना होगा क्योंकि यहाँ उलटे शूर्पनखा जैसी लड़कियां ही छेड़ती हैं.
भाइयो और बहनो आप लोग बुरा तो नहीं मान रहे हैं न ?अरे ऋषियों  के कडवे प्रवचन लाभदायक होते हैं.रावण के लोग ऐसे ही लोगों को पकड़कर खा जाते थे.यह पूरा श्रीलंका चलता फिरता स्लोटर हाउस ही तो है.मगर अब ऐसे नहीं चलेगा.अब भारत के पड़ोस में ऐसा नहीं चलेगा.अब सभी को लाइसेंस लेने होंगे.यहाँ के सभी पशुओं का विशेष रूप से गोमाता का आधार कार्ड बनेगा.और हम इस मामले में आपकी पूरी मदद करेंगे.हम अपने यहाँ भी यह योजना लागू कर रहे हैं.
रावण के दूसरे राजनीतिक दलों के साथ संबंधों की जांच होगी.जरूर उसका सम्बन्ध कांग्रेस से था.नहीं तो इतनी बड़ी सोने की लंका.असंभव है.
भाइयों और बहनो मेरा तो हिंसा में कतई विश्वास नहीं है.कभी था भी नहीं.जो कुछ बात आप लोगों के कानों तक पहुँची होगी, वह सब विपक्ष और विपक्षी मीडिया की वजह से.इस पाप भूमि में हमारे यहाँ से हनुमानजी आये थे.क्या किया था याद है न?पूरी लंका को तहस-नहस कर दिया था.मैं भी कर सकता हूँ क्योंकि मेरे भक्त भी मुझे हनुमान से कम नहीं मानते.मगर मैंने कहा न मेरा हिंसा में कतई विश्वास नहीं है.सहारनपुर से कुछ ख़बरें आ रही थीं.हमने निंदा की.मन थोड़ा घूमने का हुआ तो मैं आ गया भगवन बुद्ध की शरण में.वैसे बुद्धं शरणम गच्छामि वाले लोग मुझे बहुत पसंद हैं.अम्बेडकरजी से हम कितना प्रेम करते हैं, यह बताने की जरूरत नहीं है.हम चाहते हैं कि हमारी पार्टी की शाखा यहाँ भी खुले .विभीषणजी को इस सिंघल द्वीप का अध्यक्ष बनाऊँ.मैं आकर यहाँ चुनाव में रोड शो करूं.इस तरह से दोनों देशों के सम्बन्ध मजबूत बनें और आप लोग भी सभ्य और सुसंस्कृत बनें.आप के देश में भी जो भिन्न भाषा, भिन्न संस्कृति, भिन्न देश, भिन्न रहन-सहन के लोग रहते हैं, उनको इस देश से खदेड़ कर बाहर किया जाए.अरे भाई आपका इतिहास अलग है.आपका भूगोल अलग है तो फिर आप देशभक्त कैसे हुए?आप तो घुसपैठिये हैं.आप देश के गद्दार हैं.इनसे निजात बी.जे.पी. ही दिलायेगी.यहाँ बड़ी संख्या में बी.जे.पी. और आर.एस.एस.की शाखा खुले.बी.जे.पी. सत्ता में आये, मेरा वादा है आप सभी के अच्छे दिन जरूर आयेंगे.पुनः आप हमें शीघ्र  बुलाइएगा.आपने हमें इतने ध्यान से सुना.खूब तालियाँ बजाईं.बहुत-बहुत धन्यवाद.अब मैं ऋषि वाणी को विराम देता हूँ.''

आत्मनिर्भर शशि कुमार सिंह

आत्मनिर्भर

''रोको रोको  जल्दी रोको नहीं तो गाय-गाय चिल्लाऊंगा फिर समझ लेना.दिखाओ ट्रक में क्या है?''
''कुछ नहीं साहब कचरा है.फेंकने जा रहा हूं.''
''ठीक है दिखाओ.''
''ठीक है साहब.''
''अरे ये तो नेताजी लोग लग रहे हैं.तुम कह रहे हो कचरा है.''
''एक ही बात है सर.''
''तुम इनका महत्व नहीं समझोगे.हम 'मेक इन इंडिया' के तहत कचरे से बिजली बनायेंगे.देश को बिजली की तत्काल आवश्यकता है.''
''मगर साहब ये लोग तो भ्रष्ट और देशद्रोही पार्टी में रहे हैं.आप भ्रष्ट और देशद्रोहियों को अपनी पार्टी में लेकर अपनी पार्टी को क्यों अशुद्ध कर रहे हैं.''
''देखो मूल चीज है आत्मा.अब अगर इनकी आत्मा कह रही है कि वह पार्टी इनके लिए ठीक नहीं थी.हमारी पार्टी ठीक है तो हम इनका स्वागत करते हैं.हम इनका हल्का सा बौद्धिक करेंगे.फिर तुम भी नहीं पहचान पाओगे.ये हमसे भी बड़े देशभक्त और ईमानदार हो जायेंगे.देशभक्ति और ईमानदारी भी एक नशा है, बस लगने की देर है.इन्हें भी लग जायेगा.''
''बिलकुल साहब आप जैसा देशभक्त और ईमानदार मैंने नहीं देखा.....ठीक है साहब जल्दी ट्रक से कचरा ले जाइए और बिजली बनाइये.''
''बिलकुल हम कचरे से बिजली बनाकर समूचे देश में तेजी से आत्मनिर्भर हो रहे हैं.''

राष्ट्रऋषि घर पर हैं?'

'राष्ट्रऋषि घर पर हैं?'

''राष्ट्रऋषि घर पर हैं क्या?''
''आप लोग कौन हैं, क्या काम है?''
''हम लोग देशभक्त हैं और उससे ज्यादा राष्ट्रऋषि के भक्त हैं. हम  पूछने आये हैं कि पाकिस्तान पर हमला कब करना है.''
''राष्ट्रऋषि विश्राम कर रहे हैं .जब से बिहार होकर आये हैं तब से बस सो रहे हैं.जब नींद खुलती है तो गाते हैं, 'डाका तो नहीं डाला चोरी तो नहीं की है' और फिर चिर निद्रा में चले जाते हैं.''
''बिहार किस काम से गए थे?''
''कह रहे थे कि पार्टी का काम है.''
''अरे ऋषिवर कहीं पार्टी के काम से जाते हैं तो रोड शो करते हैं जिसका प्रसारण न्यूज़ चैनल पर होता है.''
''अच्छा फिर.''
''मुझे तो संदेह हो रहा है कि कहीं राष्ट्रऋषि बिहार की उस पार्टी में तो नहीं गए जिसमे लाखों लीटर.''
''हे भगवान् मतलब राष्ट्रऋषि झूठ बोल रहे थे.वे चूहों...''
''हम लोग नहीं कह रहे कि राष्ट्र ऋषि चूहा''
''देखिये आप लोग कहें न कहें मैं तो राष्ट्र ऋषि को जानती हूँ न.उनके यहाँ बहुत दिनों से काम कर रही हूँ.आपके राष्ट्रऋषि न फऊंकते बहुत जादा हैं.उनसे कुछ होता जाता नहीं.''

दूसरा आर एस एस - शशि कुमार सिंह

दूसरा आर.एस.एस.

''भाइयो और बहनो आप लोग आर.एस.एस.का फुल फॉर्म जानते  हैं ?नहीं न.मैं बताऊंगा.एक आर.एस.एस.की स्थापना १९२५ में हुई थी.''
''कौन आर.एस.एस.?''
''अरे वही जिसने हमें आज़ादी दिलाई.''
''एक की स्थापना हुई थी, मतलब  दूसरा आर.एस.एस.भी है?''
'' खा गए न गच्चा?अच्छा बताओ  मुझे प्रधानसेवक किसने बनाया?''
''किसने?''
''अरे वही हमारे मासूम भक्त .''
''ऋषिवर थोड़ा स्पष्ट करें न.इतनी क्लिष्ट शैली हमें समझ में नहीं आती.''
''ये हुई न मुद्दे वाली बात.देखो भक्त कहने से हमारे फ़ॉलोवर, हमारे ब्लाइंड सपोर्टर, नाराज होते थे.अब वे 'राष्ट्रऋषि सेवक संघ' का गठन कर लेंगे.तो हुआ न दूसरा आर.एस.एस.''
''वाकई ऋषिवर सिद्ध पुरुष हैं.''

उपहार

उपहार

''स्मृतिजी आपने २०१३ में तत्कालीन प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को चूड़ियाँ भेजने के लिए कहा था.याद है न.''
''हाँ हाँ याद है.कैसे भूल सकती हूँ. मैं सच्ची भारतीय हूँ.कितना बड़ा नक्सली हमला हुआ था आपको याद है न..हमारे कितने जवान शहीद हुए थे.ये कोई कैसे भूल सकता है.''
''मैडम इतिहास अपने को दुहरा रहा है....आज के प्रधानमंत्री और गृह मंत्री को आप क्या भेजना चाहेंगी?''
''देखिये आपने तो मुझे धर्म संकट में डाल दिया.खैर मैं सच्ची भारतीय हूँ.भले ही मेरा सरनेम ईरानी हो.देश का सवाल है, मैं पार्टी लाइन से ऊपर उठकर बात करूंगी.कोई उपहार अपनी हैसियत के हिसाब से ही दिया जाता है.उस समय मैं किसी पोस्ट पर नहीं थी.इसलिए सिर्फ चूड़ियाँ भेज पाई.आज तो मैं कपड़ा मंत्री हूँ.इसलिए पूरा साड़ी, साया, ब्लाउज, मेकअप का सामान और चूंकि मेरा सम्बन्ध फिल्म और कला जगत से है इसलिए एक ढोलक भी भेजूंगी.''
''अरे वाह मैडम आप तो वाकई देशभक्त हैं.''
''और नहीं तो क्या मुझे शिक्षा मंत्री बनाकर हटा दिया.क्या मैं गलत चला रही थी.''

राष्ट्र ऋषि शशि कुमार सिंह

राष्ट्र ऋषि

''प्रधान मंत्री जी बधाई हो.आप तो राष्ट्र ऋषि हो गए.''

.''हाँ मगर ये बात कोई ऋषि ही समझ सकता है.राष्ट्र को रामदेवजी का कृतज्ञ होना चाहिए ''

''इसलिए कि उन्होंने एक राज्य ऋषि को राष्ट्र ऋषि बना दिया?''

''नहीं यह तो तुम राष्ट्र का अपमान कर रहे हो.मैं कभी भी राज्य ऋषि नहीं रहा. मैं तो सदैव से अन्तराष्ट्रीय स्तर और चिन्तन का महापुरुष हूँ.वसुधैव कुटुम्बकम हमारी परंपरा रही है.''

''सर यह सम्मान तो भारत रत्न और नोबेल से भी बड़ा है.''

''देखो भारत रत्न तो पक्का है.आज नहीं तो कल.रही बात नोबेल की तो नोबेल की बात ही कुछ और है.चक्कर में हूँ कि मिल जाए.''

''सर कश्मीर में जवानों के सर काट लिए  गए.''

''अब तुम्ही बताओ.मनमोहन के समय सिर्फ एक सर कटा था.हमने कहा मेहमान के दोनों हाथ भरे होने चाहिए.इसलिए दो सर काटकर दे दिए.''

''सर इस पर भारत सरकार कोई एक्शन?''

''देखो पहले तो हमारी सरकार इस घटना की घोर निंदा करती है.पहले भी कर चुकी है.हमारे सुयोग्य मंत्री भी हिन्दी और अंग्रेजी में कई बार भिन्न प्रकार से निंदा कर चुके हैं.एक बार पुनः हमारी सरकार  निंदा करती है.ये शहीद देश के काम आये हैं.इनकी शहादत बेकार नहीं जायेगी.''

''मतलब सर पाकिस्तान पर हमला?''

''देखो भारत हमेशा से एक शांति प्रिय और अहिंसक देश रहा है और मेरा कभी भी हिंसा में विश्वास नहीं रहा है.''

''सर २००२ में भी नहीं.''

''पहले थोडा बहुत था मगर अब नहीं अब तो मेरा ऋषित्व जग गया है.ह्रदय परिवर्तन तो कभी भी हो सकता है न?सम्राट अशोक का नहीं हुआ?''

''मगर सर.''

''क्या मगर सर.मगर सर.इस समय मगर पर नहीं गाय पर बात करनी हो तो करो.तीन तलाक पर कुछ पूछना हो तो पूछ सकते हो.''

''सर हमला कब तक?''

''अरे कुछ २०१९ के लिए भी छोड़ दो.''

''सर तब भी कुछ योग?''

''इस समय सिर्फ राजयोग.''

''मगर सर.''

''फिर वही मगर सर मगर सर कर रहे हो.मैं ऋषि हूँ.कोई सर नहीं.अभी प्रकृति का आनंद लेने दो.रामदेव जी इस पत्रकार को पवित्र गोमूत्र की प्रयोगशाला की ओर विचरण कराइए.यह हमें हिंसक बनाना चाहता है.जय केदारनाथ जी.इस समय देशवासियों को सद्बुद्धि और धैर्य प्रदान करें और हमारे भक्तों को इनका सामना करने की शक्ति.''

''एक बार सब बोलो राष्ट्र ऋषि जी की जय.केदारनाथ जी की जय.बद्रीनाथ जी की जय.''

''रामदेवजी एक बात कहनी है.''

''आदेश करिए राष्ट्र ऋषि ''

''हमारे अध्यक्ष जी को भी कोई उपाधि''

''ठीक है हो जायेगा ये कौन सी बड़ी बात है.हो जाएगा.मगर अध्यक्षजी इस समय कर क्या रहे हैं.''

''कुछ नहीं इस समय  दोनों खाली थे.इसी समय तो थोडा खाली समय मिला है नहीं तो सदैव चुनावों में व्यस्तता.थोड़ी फुर्सत मिली तो मैं इधर प्रकृति का आनंद लेने आया और वो एम्.सी.डी.चुनावों में जीत का जश्न.''

''एक बार फिर बोलो राष्ट्र ऋषि की जय.केदारनाथजी की जय.बद्रीनाथजी की जय.''

ब्रेकिंग न्यूज़' शशि कुमार सिंह

'ब्रेकिंग न्यूज़'

''सेक्रेटरी जरा न्यूज़ लगाओ देखो ए.के.49 कहाँ पहुंचा. देखो ब्रेकिंग न्यूज़ आ रहा होगा-'केजरीवाल का कॉलर फटा.'
''मुख्यमंत्री को घसीटते हुए तिहाड़ तक ले गए बर्खास्त मंत्री.''
''राजनेता का सिंघम अंदाज देख लोग दंग''
''सभी बनाते रहे वीडियो, नहीं सुनी किसी ने सी.एम.की चीख पुकार.''
''सर एन.डी.टी.वी.पर तो सहारनपुर आ रहा है.ये तो न्यूज़ नहीं है.''
''जी न्यूज़ लगाओ.''
''सर इसमें तो आपकी 'श्रीलंका यात्रा की उपलब्धियां'कार्यक्रम आ रहा है.''
''उफ़ इस बाभन पर पूंजी निवेश करना लगता है बेकार जाएगा.अच्छा सुनो चोली में कॉलर नहीं होता ना?''
''नहीं सर.क्यों?''
''थैंक गॉड.कुछ नहीं किसी भारतीय नागरिक ने  उपहार में भेजा था न, इसलिए पूछ रहा था.''

नयी पार्टी - शशि कुमार सिंह

नयी पार्टी

''हाफिज़ भाईजान आपको नयी पार्टी बनाने की जरूरत क्यों आन पड़ी?और उसका एजेंडा क्या होगा?''
''तफसील से बताता हूँ.सब्र रखो.देखो हिंदुस्तान में हमारी पार्टी की एक शाखा थी.''
''हिंदुस्तान में?''
''हाँ हाँ.हिंदुस्तान में.''
''तो हमारी पार्टी की शाखा बिहार में थी.याद करो.''
''जी याद नहीं आता.''
''तुम भी देशद्रोही हो.तुम्हें याद नहीं आएगा.''
''बिहार में किसके जीतने पर हमारे मुल्क में पटाखे फूटे थे?''
''जी जदयू जनाब........ओहोहोहो हो.अब समझा, मगर उसे तो हिंदुस्तान की सबसे बड़ी देशभक्त पार्टी ने अपने में मिला लिया?''
''इसीलिए तो हमें नयी पार्टी बनानी पड़ी.''
''ज़नाब हिंदुस्तान में इसकी शाखा?''
'वह तो वहाँ के देशभक्त लोग हर पार्टी में मेरी पार्टी की शाखा खोज लेंगे.और बी.जे.पी.के साथ गठबंधन करके हम कश्मीर में चुनाव भी लड़ेंगे.''
''बी.जे.पी.से गठबंधन?''
''क्यों पी.डी.पी.के साथ गठबंधन हो सकता है तो हमारी पार्टी से क्यों नहीं.''
''आमीन.''
''शुक्रिया.''

मलयज शीतलाम शशि कुमार सिंह

मलयज शीतलाम

''सर अस्पतालों में ऑक्सीजन भेज दें.?''
''क्या अपने देश में ऑक्सीजन की कमी है?यह राष्ट्रद्रोही बात कर रहे हो.जम्बूद्वीप मलयज शीतलाम का देश है.जाओ जरूरी काम करो.''
''क्या सर?''
''मदरसों में गणतंत्र दिवस की वीडियोग्राफी के लिए कैमरे भेजो.''
''सर गणतंत्र दिवस नहीं स्वतंत्रता दिवस ''
''तुम लोग ज्यादा जानते हो?स्वतन्त्रता संग्राम में हिस्सा हम लोगों ने लिया था.जो कहा जा रहा है, करो.''

भेंट शशि कुमार सिंह

भेंट
''सर पहले आप निंदा करें तो एक बात याद दिलाऊँ.''
''हाँ निंदा करता हूँ.बोलो.''
''सर पाकिस्तान में आतंकियों ने सैकड़ों बच्चों की हत्या कर दी थी.''
''हाँ हाँ याद है.निंदा,घोर निंदा, कड़ी निंदा  करता हूँ.हा हा हा .''
''आप हँस रहे हैं सर.कोई मजेदार चुटकुला याद आ गया क्या?''
''बेवक़ूफ़ हैं पाकिस्तानी.''
''क्यों सर.''
''अरे जो काम थोड़ी सी चालाकी से हो सकता है उसके लिए हिंसा का मार्ग उचित नहीं..''
''क्या मतलब सर?''
''अभी दिखाता हूँ.''
''कैसे सर.''
''अरे मंत्री से कहो बच्चों के अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दे.''
''ठीक सर.आपके पूर्व संसदीय क्षेत्र से ही शुरू करते हैं.''
''जय हो बाबा गोरखनाथ भक्त की यह तुच्छ भेंट स्वीकार करो.''

बच्चे- शशि कुमार सिंह

बच्चे
''सर कुछ ट्विट कर दीजिये न.''
''क्या बकवास कर रहे हो.कितने मरे हैं?''
''सर शायद ३०.''
''डिजिट में बताओ.''
''सर तीन जीरो.''
''उफ़ हम गुजरात में तीन-जीरो नहीं कर पाए.ये अहमद का बच्चा''
''सर अहमद नहीं गोरखपुर के बच्चे.''

योगी योगी शशि कुमार सिंह

योगी योगी

'ये बच्चे क्यों मरे?''
''ये योगी-योगी नहीं कह रहे थे.''
''मगर इससे क्या, ये तो बच्चे हैं.''
''कल यही बच्चे बड़े होते.नियम सबके लिए एक है.''
''कौन सा?''
''यही, सुना नहीं है.अगर यू.पी.में रहना है तो योगी-योगी कहना है.''

समझ शशि कुमार सिंह

समझ
''बच्चों आज हम जनरल नॉलेज पढेंगे.''
''जी गुरूजी.''
''''बच्चे किस महीने में सबसे ज्यादा रोते हैं?''
''गुरूजी फरवरी में.''
''और बच्चे किस महीने में सबसे ज्यादा घरवालों को रुलाकर दुनिया से चले जाते हैं?''
''गुरूजी पता नहीं.''
''महान बाल वैज्ञानिक स्वास्थ्यमंत्री, उत्तरप्रदेश  के नव अनुसंधानानुसार अगस्त में.''
''हाँ गुरूजी अब समझ गए.दूसरा सवाल पूछिए.''
''भारत कब आज़ाद हुआ था?''
''गुरूजी १६ मई २०१४ को.''
''हाँ तुम लोग वाकई समझ गए.''

परीक्षा की घड़ी - शशि कुमार सिंह

#परीक्षा_की_घड़ी
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● ''विपक्षी तो ऐसे शोर मचा रहे हैं जैसे सपा, बसपा और कांग्रेस के जमाने में बच्चे मरते ही न थे.''

◆ ''और क्या?''

● ''ऐसे कठिन समय में हमें दृढ़ता के साथ आदरणीय योगीजी और परम आदरणीय मोदीजी के साथ खड़े रहना चाहिए.
जिन्दगी लेने वाला अगर भगवान् है तो देने वाला भी तो वही है.''
''यह हम देशभक्तों के लिए परीक्षा की घड़ी है. मैंने खुद देखा है अपनी आँखों से, वहाँ सिलिंडर की कोई कमी नहीं.''

(अंदर से पत्नी की आवाज़)
■ ''सुनते हैं जी!
देखिये बच्चे को क्या हो गया.
मेरा लाल आँखें ही नहीं खोल रहा है.
हे भगवान् ये क्या हो गया मेरे बच्चे को. जल्दी हॉस्पिटल चलिए.''

● ''ठीक है. जल्दी करो.
हे भगवान् मेरे बच्चे की बचा लीजिये.''

■ ''अरे उधर कहाँ जा रहे हैं?
महंत जी का अस्पताल तो उधर नहीं पड़ता है न.''

● ''अरे पागल औरत. बच्चे के जीवन का सवाल है. उधर तो कई दिनों से देख रही हो न, सरकार ऑक्सीजन सिलिंडर तक का इंतज़ाम नहीं कर पा रही है. नालायक, नक्कारी सरकार. इस योगी को तो नरक में भी जगह नहीं मिलेगी. और मोदी एक नंबर का धूर्त. लोग गलत थोड़ी शोर मचा रहे हैं.''

   Shashi Kumar Singh

नेताजी

नेताजी

नहीं इसमें कुछ भी बुराई नेताजी.
बच्चों की मारो सदा खराई नेताजी

आज बने हो क्या खूब  माननीय
कल तक तो  भैंस चराई नेताजी

फूंको,अयोध्या,मथुरा,काशी,
जैसे कपि ने लंक जराई नेताजी

क्या होंगे डॉक्टर एम्स  दवाएं
खूब करो मन्त्र से झराई नेताजी

पड़े अपने पर तो समझ आये
अभी तो है पीर पराई नेताजी
 
छोड़ो ना, जो आया है वो जाएगा  
आप करिए गले की तराई नेताजी

(ये जानते हुए भी कि रदीफ़ काफ़िया सब गड़बड़ है.)

निलंबन शशि कुमार सिंह

#निलंबन

''डॉ.कफील!
जब ये मौतें हुईं तो तुम क्या कर रहे थे?''

''सर मैं ऑक्सीजन सिलिंडर के अरेंजमेंट में बिजी था.''

''क्यूँ? कुछ क्षण प्रतीक्षा नहीं कर सकते थे?''

''किसकी सर?''

''अरे मैं हवन करने के लिए ब्राह्मण भेज ही रहा था. हवन से वातावरण शुद्ध हो जाता. किसी को सांस लेने में तकलीफ ही नहीं होती. चिकित्सालय में वायु का अबाध संचार हो जाता. तुम्हारे कारण सनातन संस्कृति को कुठाराघात पहुंचा है. मैं यहाँ से सांसद रहा हूँ. क्या मुझे यह ज्ञात नहीं था कि यहाँ ऑक्सीजन की आवश्यकता है?
मैं विगत दो दशक से देख रहा हूँ. क्या मैं चेहरे से इतना मूर्ख लगता हूँ?मैं सनातन उपाय आजमाना चाहता था, पर तुम्हारे कारण यह प्रयोग असफल रहा. उफ़्फ़ मात्र 80?....

● तुम्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है.
और सुनो पंद्रह अगस्त को गणतंत्र दिवस मना रहे हो न?''

''गणतंत्र दिवस?''

''हाँ गणतंत्र दिवस. क्यूँ?''

''जी सर.''
***
Shashi Kumar Singh

एडजस्टमेंट- शशि कुमार सिंह

एडजस्टमेंट

''और भाईजी क्या चल रहा है?''
''बस पंद्रह अगस्त की तैयारी.''
''क्या मज़ाक कर रहे हैं?आप लोग और पंद्रह अगस्त? ''
''क्यों सरकार अपनी है तो नहीं मनाएंगे?''
''मगर आपने तो आज़ादी के दिन भी शोक मनाया था?''
'''आप लोग न हमेशा दुखती रग पर हाथ रख देते हैं.यह सत्य है वो मुसलमानों के हाथों हिन्दुओं की पराजय का दिन था.ये कैसे भूल सकते हैं?''
''भाईजी नागपुर में झंडा फहरता है?''
''मजबूरी है.फहराना पड़ता है.क्यों?''
''ऐसी क्या मजबूरी है?''
''अरे मदरसों पर फहरवाना भी है न इसलिए थोड़ा एडजस्ट करना पड़ता है.और अन्दर की बात बताऊँ, नहीं तो राष्ट्रध्वज से हमारा कोई मोह थोड़ी है.''
''संघ ने आज़ादी की लड़ाई में कोई हिस्सा नहीं लिया था, आप लोगों को इसका अफ़सोस नहीं होता.?''
''इस प्रश्न का उत्तर मैं कुछ वर्षों बाद दूंगा.इतिहास पुनर्निर्माण पर हम काम कर रहे हैं.आप भी दंग रह जायेंगे.''
''मैं तो अभी भी दंग हूँ.''
''क्यों?''
''एडजस्टमेंट देखकर.''
''क्या करें भाईजी बहुत कुछ एडजस्टमेंट करना पड़ता है.''

रिहर्सल शशि कुमार सिंह

रिहर्सल

''अमितजी आप को कौन सा अभिनेता पसंद है?''
''है तो देशद्रोही मगर शाहरुख़ खान.''
''सर आपको शाहरुख का कौन सा डायलाग पसंद है?''
''फिल्म दिलवाले दुल्हनियां ले जायेंगे का डायलाग,''बड़े बड़े शहरों में छोटी छोटी बातें होती रहती हैं.''
''सर आप भी एक फिल्म बनाइये ना.''
''कौन सी ?''
''अच्छे दिन कब आयेंगे.''
''अच्छा.''
''कब रिलीज होगी?''
''देखते हैं २०१९ का टार्गेट रखेंगे.''
''सर गोरखपुर हादसे पर कुछ कहेंगे?''
''बड़े बड़े देशों में छोटे-छोटे हादसे होते रहते हैं.''
''सर ये क्या?''
''वो मैं डायलाग का रिहर्सल कर रहा था.''

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