Friday, 6 October 2017

एडजस्टमेंट- शशि कुमार सिंह

एडजस्टमेंट

''और भाईजी क्या चल रहा है?''
''बस पंद्रह अगस्त की तैयारी.''
''क्या मज़ाक कर रहे हैं?आप लोग और पंद्रह अगस्त? ''
''क्यों सरकार अपनी है तो नहीं मनाएंगे?''
''मगर आपने तो आज़ादी के दिन भी शोक मनाया था?''
'''आप लोग न हमेशा दुखती रग पर हाथ रख देते हैं.यह सत्य है वो मुसलमानों के हाथों हिन्दुओं की पराजय का दिन था.ये कैसे भूल सकते हैं?''
''भाईजी नागपुर में झंडा फहरता है?''
''मजबूरी है.फहराना पड़ता है.क्यों?''
''ऐसी क्या मजबूरी है?''
''अरे मदरसों पर फहरवाना भी है न इसलिए थोड़ा एडजस्ट करना पड़ता है.और अन्दर की बात बताऊँ, नहीं तो राष्ट्रध्वज से हमारा कोई मोह थोड़ी है.''
''संघ ने आज़ादी की लड़ाई में कोई हिस्सा नहीं लिया था, आप लोगों को इसका अफ़सोस नहीं होता.?''
''इस प्रश्न का उत्तर मैं कुछ वर्षों बाद दूंगा.इतिहास पुनर्निर्माण पर हम काम कर रहे हैं.आप भी दंग रह जायेंगे.''
''मैं तो अभी भी दंग हूँ.''
''क्यों?''
''एडजस्टमेंट देखकर.''
''क्या करें भाईजी बहुत कुछ एडजस्टमेंट करना पड़ता है.''

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