साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
फेसबुक पर वही भीड़ है जो ट्रेन पर थी
हम कातिल भी हैं हमीं शिकार भी
कोई है जो दूर बैठा हमें चाकू थमाता है फिर छीन लेता है
एक और है जो अफवाह है वह दूर बैठा यह सब देख रहा है
ये सारे साजिशें उसी अफवाह का नाम लेकर की जा रही हैं।
अरमान
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