Tuesday, 3 October 2017

आडवाणी ( कविता )अरमान आनंद


आडवाणी
चौराहे पर खड़ी मूर्ति हैं
कहीं आ नहीं सकते जा नहीं सकते
सर पर बैठा कौआ
उड़ा नहीं सकते
चुप चाप
सड़क पर
बलात्कार कर फेकी गयी लड़की को देखते हैं
जिसका चेहरा
भारत माता से मिलता जुलता है

नंगे समाज की ओर जाती हुई
मुंह काला कर
पृथ्वी पर लेटी हुई सड़क पर
एक तबाह नग्न लड़की
ओह
अच्छा है
चश्मे पर कबूतर बीट कर गया है

वो देखते हैं
भविष्य की ओर जाता हुआ लड़का
दलालों के कंधे पर बैठ
विश्व भ्रमण को निकल गया है
आडवाणी
चौराहे पर खड़ी वह मूर्ति हैं
जिसके सर और चश्मे पर कौवे - कबूतर बीट कर रहे हैं
एक फर्क है
कहते हैं
शहर में कौओं की पहली खेप आडवाणी लाये थे
सुना है
एक बच्चा जिसने आडवाणी की ऊँगली पकड़ रखी थी
उसे लठैत उन्होंने ही बनाया था
( Ravish Kumar के एक लेख को पढ़कर)
-अरमान आनंद

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