साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
शरद पूर्णिमा ----------------
पूरे चाँद की रात प्रेमिका की टिकुली सा मकनमोहक चाँद
मैंने उससे कहा छत पर चलोगी आईना देखने
अरमान आनंद
मैने सर झुकाया, तुझे इल्म नहीं जा तू पत्थर हो जा, परवाह नहीं। अरमान
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