साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
देश के हर नागरिक के लिए -------------------------------
देश के हर नागरिक के लिए यह सज़ा है कि वह जानता रहेगा शर्मसार होगा मगर इसे कभी कह नहीं पायेगा : 'मेरी बच्ची ! तुम महफ़ूज़ नहीं हो !'
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