साहित्यिक -सांस्कृतिक ई पत्रिका
रक्तपात
कदली के कुञ्ज में, कोने में जहाँ दीपक की आड़ जैसी अंध-ज्योत थी वहीँ कौमार्य नष्ट किया उसका किसे समाचार होता यदि कौओं का झुण्ड 'षडज षडज' करता नहीं ऊपर; देखकर उसका शुद्ध, गाढ़ा रक्त उसी की कोपवती आँखों के रंगवाला
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